Bhagat Singh 115th Birth Anniversary 2021

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आज यानी 27 सितंबर को भारत वर्ष के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक शहिद भगत सिंह की 115वीं जयंती है। पूरा देश उनके जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनका जन्म 27 सितंबर 1906 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा नामक गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।

आज यानी 27 सितंबर को भारत वर्ष के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक शहिद भगत सिंह की 115वीं जयंती है। पूरा देश उनके जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनका जन्म 27 सितंबर 1906 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा नामक गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। 

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एक देशभक्त परिवार में जन्म लेने की वजह से ही भगतसिंह को देशभक्ति का पाठ विरासत के तौर पर मिला। 13 अप्रैल 1919 मे अमृतसर में हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने उनके सोच पर गहरा प्रभाव डाला था।

चौरी चौरा हत्याकांड की असफल नीति एवम परिणाम के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सशस्त्र क्रांति ही स्वतंत्रता दिलाने का एक मात्र रास्ता है। उसके बाद वह चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्‍व में गठित हुई गदर दल के हिस्‍सा बन गए। इन दोनों ने मिलकर कई मौकों पर अंग्रेजों की नाक में दम किया।

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चंद्रशेखर आजाद के साथ जुड़ने के बाद उन्‍होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। 9 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर से लखनऊ के लिए चली 8 नंबर डाउन पैसेंजर से काकोरी नामक छोटे से स्टेशन पर सरकारी खजाने को लूट लिया गया। यह घटना काकोरी कांड नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है।

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इस घटना को अंजाम भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और प्रमुख क्रांतिकारियों ने साथ मिलकर अंजाम दिया था। जेल में भगत सिंह करीब 2 साल रहे। इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रान्तिकारी विचार व्यक्त करते रहते थे।जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हडताल की। उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिये थे।

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23 मार्च 1931 को शाम में करीब 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फाँसी दे दी गई। मृत्यु के समय इनकी उम्र महज 23 वर्ष ही थी। इसके बाद भगत सिंह हमेशा के लिए अमर हो गये। वे हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बंगला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक थे। वे भारत में समाजवाद के प्रथम व्याख्याता थे।

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भगत सिंह को फिल्में देखना और रसगुल्ले खाना काफी पसंद था। वे राजगुरु और यशपाल के साथ जब भी मौका मिलता था, फिल्म देखने चले जाते थे। उन्हें चार्ली चैप्लिन की फिल्में बहुत पसंद थीं। आज भी भारत और पाकिस्तान की जनता भगत सिंह को आज़ादी के दीवाने के रूप में देखती है जिसने अपनी जवानी सहित सारी जिन्दगी देश के लिये समर्पित कर दी।

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