Dr. Ram Manohar Lohia 54th Death Anniversary 2021

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देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया। जिनमें से एक थे राममनोहर लोहिया। आज उनकी 54वी पुण्यतिथि है। पूरा देश उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है।

देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया। जिनमें से एक थे राम मनोहर लोहिया। आज उनकी 54वीं पुण्यतिथि है। पूरा देश उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है।

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डॉ. राम मनोहर लोहिया :- जीवन परिचय 

उनका जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबर पुर में हुआ था। उनके पिताजी का नाम हीरालाल लोहिया था जो पेशे से एक अध्यापक व हृदय से सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उनके पिताजी गांधी जी के अनुयायी थे। जब वे गांधी जी से मिलने जाते तो राम मनोहर को भी अपने साथ ले जाया करते थे। इस तरह से गांधी जी का प्रभाव इनपर पड़ा। उनके माता का नाम चंदा देवी था।

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उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश से ही पूरी की फिर 12वी कक्षा के लिए उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। कोलकाता स्थित विद्यासागर कॉलेज से उन्होंने द्वितीय श्रेणी से स्नातक पास की।

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उन्होंने जर्मनी की राजधानी बर्निंग से नमक सत्याग्रह विषय पर अपना शोध प्रबंध पूरा कर अर्थशास्‍त्र में डॉक्‍टरेट की उपाधि केवल दो वर्षों में ही प्राप्‍त कर ली थी।

डॉ. राम मनोहर लोहिया :- राजनीति

1933 में मद्रास पहुंचने पर राम मनोहर लोहिया गांधीजी के साथ मिलकर देश को आजाद कराने की लड़ाई में शामिल हो गए। इसमें उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सन् 1935 में उस समय कांग्रेस के अध्‍यक्ष रहे पंडित नेहरू ने राम मनोहर लोहिया को कांग्रेस का महासचिव नियुक्‍त किया। उन्होने अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आन्दोलनों का नेतृत्व किया। वे अनेक सिद्धान्तों, कार्यक्रमों और क्रांतियों के जनक हैं। वे सभी अन्यायों के विरुद्ध एक साथ जेहाद बोलने के पक्षपाती थे। उन्होंने एक साथ सात क्रांतियों का आह्वान किया।

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डॉ. राम मनोहर लोहिया :- लेख एवं पुस्तक

उन्होंने अनेकों विषयों पर अपने विचार लेख एवं पुस्तकों के रूप में प्रकाशित कीं। जिनमें अंग्रेजी हटाओ, इतिहास चक्र, देश- विदेश नीति-कुछ पहलू, धर्म पर एक दृष्टि, भारतीय शिल्प, भारत विभाजन के गुनहगार, मार्क्सवाद और समाजवाद, राग, जिम्मेदारी की भावना, अनुपात की समझ, समलक्ष्य, समबोध, समदृष्टि कुछ प्रमुख है।

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डॉ. राम मनोहर लोहिया :- मृत्यु

30 सितम्बर 1967 को नई दिल्ली के  विलिंग्डन अस्पताल (अब लोहिया अस्पताल) में 57 वर्ष की आयु में 12 अक्टूबर 1967 को उनकी मृत्यु हो गया। उनके नाम पर कई स्मारक एवं विश्वविद्यालय बनवाए गए हैं। आज उनके नाम पर एक दर्जन से ज्यादा योजनाएं संचालित हो रही हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे।

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